WHO ने युवाओं को दी Warning – इस गलतफहमी में हरगिज न रहें के आपको नहीं छूएगा Coronavirus

WHO ने युवाओं को दी Warning – इस गलतफहमी में हरगिज न रहें के आपको नहीं छूएगा Coronavirus
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विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की तरफ से शुक्रवार को उन तमाम युवाओं को एक बड़ी चेतावनी दी गई है, जो यह मानकर चल रहे हैं कि वे कोरोना वायरस से पूरी तरह से सुरक्षित हैं। डब्लूएचओ की तरफ से यह वॉर्निंग ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया में जानलेवा वायरस कोविड-19 की वजह से मृतकों का आंकड़ा 11,000 को पार कर गया है। डब्‍लूएचओ ने साफ-साफ कहा है कि युवा इस मुगालते में हरगिज न रहें कि उन्‍हें यह महामारी छू भी नहीं सकती है। आपको बात दें कि अभी तक कोविड-19 का सबसे बुरा असर ऐसे लोगों पर देखा गया है जिनकी उम्र 60 साल से ज्‍याद है।

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वृद्धों पर ज्‍यादा असर, मगर युवा भी रहें सचेत
डब्‍लूएचओ के चीफ टेडरॉस एडहानोम घेब्रेसिस ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए हुई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कई अहम बातें कहीं। उन्‍होंने कहा कि भले ही अभी तक इस महामारी की चपेट में आने वाले वृद्धों की संख्‍या सबसे ज्‍यादा हो और अभी तक युवाओं पर उतना असर नहीं पड़ा है, मगर इसके बाद भी यह नहीं भूलना चाहिए कि अस्‍पताल में भर्ती सबसे ज्‍यादा संख्‍या युवाओं की है। उन्‍होंने कहा कि पीढ़ियों के बीच समनव्‍यता के साथ ही इस बीमारी को मात दी जा सकती है। टेडरॉस के शब्‍दों में, ‘आज मैं युवाओं को यह संदेश देना चाहता हूं: आप अजेय नहीं हैं। इस वायरस की वजह से आप कई हफ्तों तक आपको अस्‍पताल में रहने को मजबूर होना पड़ सकता हैं और यहां तक कि आपकी मौत भी हो सकती है।’

इटली के अस्‍पतालों में भर्ती हैं कई युवा

उन्‍होंने आगे कहा, ‘यहां तक कि अगर आप बीमार नहीं पड़ते हैं तो भी आप कहीं आने-जाने से जुड़े जो फैसले ले रहे हैं वे किसी की जिंदगी और मौत के बीच में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं। मैं कई युवाओं का शुक्रगुजार हू कि वह वायरस की जगह इससे जुड़ी अहम जानकारियों को फैला रहे हैं।’ डब्‍लूएचओ के इमरजेंसी डायरेक्‍ट माइकल रेयान ने कहा था कि इटली में आज हालात यह हैं कि अस्‍पतालों की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में हर तीन में से दो मरीजों की उम्र 70 साल से कम है। डब्‍लूएचओ ने कहा थोड़ी राहत की बात यह है कि वुहान जहां से वायरस निकला था, वहां पर कोई भी नया केस नहीं आया है। इससे दुनिया को इस महामारी से जूझने में नई उम्‍मीद मिली है।

Social नहीं Physical Distancing की जरूरत

संगठन के मुखिया ने इसके साथ ही ‘सोशल डिस्‍टेसिंग’ की जगह ‘फिजिकल डिस्‍टेसिंग’ शब्‍द का प्रयोग किया। टेडरॉस ने कहा कि वह इस शब्‍द का प्रयोग इसलिए कर रहे हैं ताकि दो लोगों के बीच में इतनी दूरी हो कि वायरस फैलने से रूक सके। उन्‍होंने कहा कि लोगों को आइसोलेशन में जाने की जरूरत है मगर उन्‍हें सामाजिक तौर पर आइसोलेशन की जरूरत बिल्‍कुल नहीं थी। उन्‍होंने कहा कि ऐसी संकट की स्थिति में तनावपूर्ण, कनफ्यूज और डरा हुआ महसूस करना सामान्‍य हैं। ऐसी स्थिति में आपको ऐसे लोगों से बात करनी चाहिए, जो इस बारे में जानते हैं।

Source – Dailyhunt

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